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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 60, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 60, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 60 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

स्वरेण मधुरेणैवमार्यामार्यविलासिनी । पपाठाकठिनं वामा मत्पार्श्वे मृदुहासिनी ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

भद्र, उस वामा ने मेरे पास में आकर अत्यन्त मधुर स्वर से मृदु एक आर्या पढ़ी, उस स्त्री का विलास आर्यो के जैसा ही था, उस समय उसके मुख में कोमल हास्य निखर रहा था