Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 61, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 61, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 61 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
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हिन्दी अर्थ
जैसे स्फटिक में पड़े हुए चित्र-विचित्र प्रतिबिम्ब स्फटिक रूप से ही स्थित है, वैसे
ही इस संविदेकरस ब्रह्म में पड़े ये जगत्, महाप्रलय आदि चित्रविचित्र प्रतिबिम्बरूप भाव भी
ब्रह्मरूप से ही स्थित हैं