Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 61, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 61, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 61 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
TODO
हिन्दी अर्थ
जो आत्मा के अज्ञान का साधक हैं. वह जब चरम (अन्तिम) आत्मम्राक्षात्कार वृत्ति थे प्रकाशित
हो जाता है, तब वही अज्ञान का बाधक बन जाता हैं / इस विषय में युक्ति बतलाते हैं /
यदि विचारा जाय, तो वह अज्ञान जिस ज्ञानरूप आत्मा से सिद्ध हुआ है, उसीसे वह उस प्रकार
नष्ट हो जाता है, जिस प्रकार पवन से ही जनित अग्निरूप दीपक पवन से नष्ट हो जाता है