Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 61, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 61, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 61 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
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हिन्दी अर्थ
हे रामजी, मोक्ष के लिए ये ही वर्णित
बोध आदि उपाय मैंने आपसे बतलाये । जिस पुरुष का सतत प्रयत्न आत्मा के विचार में चालू रहता
है, वही अधिकारी पुरुष इन उपायों को प्राप्त करता है, इसमें कोई संशय नहीं है