Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 61, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 61, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 61 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
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हिन्दी अर्थ
भद्र, यह सृष्टि चिदाकाश का काल्पनिक अवयव (अंग) है ओर अंगभूत
कल्पित इस सृष्टि के उदय तथा क्षय भी ऐसे ही कल्पित अंग है, अतः जो कुछ है वह चेतनरूप
आकाश है, ऐसी स्थिति में कौन नाशवान ओर अनाशवान हो सकता है ?