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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 62, Verse 1

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 62, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 62 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

श्रीराम उवाच । यदेतद्भवता दृष्टं चिद्व्योमवपुषा तदा । तदेकदेशसंस्थेन किमुत भ्रमताम्बरे ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ

जगत्‌-समूह का जो अवलोकन किया, वह क्या एकदेश में स्थित होकर किया या चिदाकाशरूप शरीर से किया (यह कहने की कृपा क्रीजिये)