Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 62, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 62, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 62 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
अस्या दृष्टेः परिणतेर्वेत्तृवेदनवेद्यधीः ।
न काचिदस्त्यभ्युदिता विज्ञानात्मैकता यतः ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
इस सर्वात्मस्वरूप दृष्टि का परिपाक हो जाने पर वेत्ता, वेदन ओर वैद्यरूप (ज्ञाता, ज्ञान
ओर ज्ञेय रूप) त्रिपुटीबुद्धि स्वात्मातिरिक्त कोई दूसरी वस्तु के रूप में नहीं रह पाती, क्योकि
विज्ञानरूप आत्मा के साथ सबकी एकरूपता उदित हो जाती हे