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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 62, Verse 18

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 62, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 62 · श्लोक 18

संस्कृत श्लोक

वसिष्ठ उवाच । तामेवार्यां पठन्ती सा तथैवानुनयान्विता । मत्समीपे नभोदेहा व्योम्नि देवीव संस्थिता ॥ १८ ॥

हिन्दी अर्थ

महाराज वसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामचन्द्रजी, उस आर्या छन्द का पाठ करती हुई उसी प्रकार प्रशंसादि प्रीतिजनक व्यापार से युक्त, चिदाकाशशरीरधारिणी वह कान्ता आकाश में देवी की तरह मेरे समीप में स्थित हुई