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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 62, Verse 22

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 62, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 62 · श्लोक 22

संस्कृत श्लोक

रूपालोकमनस्कारः कुतो नामात्मनामिति । ब्रूहि मे भगवंस्तत्त्वं यथावृत्तश्च निश्चयम् ॥ २२ ॥

हिन्दी अर्थ

एवं आकाशस्वरूप आपके लिए भी उम्चके रूपदर्शन का पर्यालोचन करना कोड सरल काम नहीं है, यह कहते हैं । भगवन्‌, बाह्यरूप आदि का दर्शन तथा आभ्यन्तर मन का अनुभव शुद्ध चिदाकाशरूप आत्माओं को कैसे हो सकता है, इसलिए उस समय आपने जैसे जगत्‌ के दर्शन तथा सम्भाषण आदि व्यवहार किये, उसका जो निचोड़ हो, वह मुझसे कहने की कृपा कीजिये