Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 62, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 62, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 62 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
रूपालोकमनस्कारैः स्वप्ने चिन्नभ एव ते ।
यथोदेति तथा तत्र तद्दृश्यं खात्मकं स्थितम् ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी, जैसे आपके स्वप्न में चिदाकाश ही बाह्य तथा आभ्यन्तर
पदार्थो के रूप से उदित होता है वैसे ही मेरे उस समाधिकाल में भी वह सारा दृश्यप्रपंच
चिदाकाशरूप ही स्थित था