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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 62, Verse 26

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 62, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 62 · श्लोक 26

संस्कृत श्लोक

परमार्थमहाधातुर्वेद्यनिर्मुक्तचिद्वपुः । एवं नाम स्वयं भाति स्वभावस्येव निश्चयः ॥ २६ ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामचन्द्रजी, जगत्‌ की वासना से उपहित चितिस्वभाव का जो निश्चय है वह एक परमार्थ महाधातु (परमार्थरूपी श्रेष्ठमणि) है, यह सर्वत्र श्रुति तथा ब्रह्मज्ञानी विद्वानों के अनुभव आदि से प्रसिद्ध है