Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 62, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 62, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 62 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
शरीरस्थानकरणसत्तायां का तव प्रमा ।
यथैव तेषां देहादि तथास्माकमिदं स्थितम् ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र,
शरीरस्थान करणों (जीभ आदि इन्द्रियों) की सत्ता में आपको कौन-सी प्रभा है ? जैसे उनके
देहादि स्थित हैं वैसे ही हमारा भी यह स्थित है