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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 62, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 62, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 62 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

यथाम्बुधिरनन्तात्मा वेत्ति सर्वान् जलेचरान् । तरङ्गावर्तफेनांश्च तथैतद्बुद्धवानहम् ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

अनन्त-समुद्राभिमानी जीव समस्त जलचरों, तरंगों, आवर्तों एवं फेनको जैसे जानता है, वैसे ही मैंने नानाविध अनेक संसारों को जाना