Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 62, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 62, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 62 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
अवयवान्स्वानवयवी यथा वेत्ति निजात्मनि ।
अनन्यानात्मनः सर्गांस्तथैतान्बुद्धवानहम् ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे अवयवी अपने अवयवों को अपने स्वरूप के अन्दर अपने से अनन्य
ही समझता है, वैसे ही इन सृष्टियों को मैंने समझा