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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 63, Verse 19

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 63, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 63 · श्लोक 19

संस्कृत श्लोक

सुप्ताः स्वप्नजगज्जालव्यवस्थाचारचारिणः । ये हता राक्षसा देवैस्ते यथैव व्यवस्थिताः ॥ १९ ॥

हिन्दी अर्थ

यह अद्र और मनुष्यों में जो दिखलाया गया न्याय हैं, उसे राक्षत आदि में लगाना चाहिए, इस आशय से कहते हैं । सोये हुए स्वप्नरूप जगज्जाल की व्यवस्था के अनुसार आचार करनेवाले जो राक्षस स्वप्न के देवताओं से मारे गये, वे असुरों के सदृश उसी स्वप्न मेँ ही व्यवस्थित है