Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 63, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 63, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 63 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
साद्र्यब्ध्युर्वीजनं दृश्यमिदं सर्वं यथास्थितम् ।
चिरायानुभवन्त्येते यथेमे वयमादृताः ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
पर्वत, सागर, पृथ्वी तथा
अनेक जनों से भरे यथास्थित इस सम्पूर्णं दृश्य प्रपंच को वे लोग चिरकालतक ऐसे अनुभव करते
हैं, जैसे ये सत्यत्वाभिमानी हम लोग अनुभव करते हैं । हे श्रीरामचन्द्रजी, उनका अपना-अपना
स्वप्न चिरकाल की अनुवृत्ति से हम लोगों के अनुभव की तरह जाग्रतअवस्थारूप ही हो जाता
है