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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 63, Verse 22

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 63, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 63 · श्लोक 22

संस्कृत श्लोक

तेषां कल्पजगत्संस्था यथास्माकं तथैव ताः । अस्माकं जगतीसंस्था यथा तेषां तथैव च ॥ २२ ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामचन्द्रजी, उनके कल्प ओर जगत्‌ की स्थिति, जैसी हम लोगों की है वैसी ही है और हम लोगों के जगत्‌ की स्थिति भी वैसी ही है, जैसी उन लोगों की है