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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 63, Verse 23

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 63, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 63 · श्लोक 23

संस्कृत श्लोक

एतेषां स्वप्नपुरुषास्त एवेमे वयं स्थिताः । ये च ते नाम संसारास्तेभ्य एकमिमं विदुः ॥ २३ ॥

हिन्दी अर्थ

ऐसी स्थिति में हम लोगों से अनुभूत हो रहा यह जगत्‌ तथा इसके भीतर रहनेवाले हम लोग यदि उनसे देख लिये जाते हैं, तब तो हे श्रीरामजी, इनके स्वप्न के जो पुरुष हैं वे ही हम लोग ये स्थित हैँ ओर उनके जो स्वप्न के संसार हैं, उनमें से कोई यह एक हमारा संसार है- ऐसा वे लोग अवश्य समझते होंगे