Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 63, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 63, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 63 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
ते स्वप्नपुरुषास्तेषां सत्या एवानुभूतितः ।
आत्मनोऽपि परस्यापि सर्वगत्वाच्चिदात्मनः ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, उनके स्वप्न के वे पुरुष अपने तथा अन्य पुरुष के अनुभव से चूँकि तुल्य हैं अतः
वे सत्य ही हैं, क्योंकि उनकी सत्ता के निमित्तभूत अधिष्ठान चिदात्मा सर्वगामी होने से तुल्य
है