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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 63, Verse 25

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 63, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 63 · श्लोक 25

संस्कृत श्लोक

यथा ते स्वप्नपुरुषाः सत्यमात्मन्यथाऽपरे । तथापि स्वप्नपुरुषाः सत्यमेव तथैव ते ॥ २५ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे आत्मा में वे स्वप्न के पुरुष सत्य हैं वैसे ही दूसरे भी पुरुष, जिनका प्रत्येक स्वप्न में मुझे अनुभव होता है, सत्य ही हैं । हे श्रीरामजी आप भी उन्हे वैसा ही समझिये