Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 63, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 63, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 63 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
स्वस्वप्नपुरपौरा ये त्वया दृष्टास्तथैव ते ।
स्थितास्तत्र तथाद्यापि ब्रह्म सर्वात्मकं यतः ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे आपने
उस अपने स्वप्न में अनेक नगर तथा अनेक नागरिक देखे, वैसे ही वे सब अब भी स्थित हैं, क्योंकि
सर्वव्यापी ब्रह्म सर्वात्मक है