Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 64, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 64, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 64 · श्लोक 16
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हिन्दी अर्थ
कहीं पर तो उसके गङ्ढों मे गीध घूम
रहे हैं, कहींपर तो समान भूभाग के कारण बड़ा ही लुभावना लगता है, कहीं पर तो उसके भीतरी
भागपर शिखर की चोटी से आक्रांत ब्रह्माजी का नगर बसा हे