Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 64, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 64, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 64 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
क्वचिच्छून्यमहारण्यवहत्कल्पान्तमारुतः ।
क्वचित्पुष्पवनोद्यानगायद्विद्याधरीगणः ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
कहीं पर तो उसमें जनों से
शून्य बड़े-बड़े जंगल हैं, कहीं पर कल्पान्त की वायु बह रही है, कहीं पर फुलवारिया में विद्याधरियों
के गान हो रहे हैं