Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 64, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 64, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 64 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
क्वचित्पातालगम्भीरगुहाकुम्भाण्डभीषणः ।
क्वचिन्नन्दनसोदर्यमुन्याश्रममनोरमः ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
कहीं पर पाताल के सदृश अत्यन्त गहरी गुफाओं में कुम्भाण्ड पिशाचों का
वास होने के कारण बड़ा भयंकर है, कहीं पर नन्दनवन के दुसरे भाई के सदृश सुन्दर मुनि के
आश्रमां से बड़ा लुभावना लगता है