Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 64, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 64, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 64 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
क्वचिदक्षयमत्ताभ्रः क्वचिद्दुर्लभवारिदः ।
क्वचिद्गर्भगुहाश्वभ्रगहनोपान्तमण्डलः ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
कहीं पर निरन्तर ही स्थित रहने वाले मतवालों की नाई
गर्जन में निरत मेघमण्डल हैं, तो कहीं पर मेघों का दर्शन ही दुर्लभ है, कहीं पर उसकी सीमा के
समीपस्थ मण्डल भीतरी गुहाच्छिद्र के कारण अतिगहन हैं