Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 64, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 64, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 64 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
क्वचित्सलिलकल्लोलजलदोल्लासघर्घरः ।
क्वचिन्मत्ताप्सरोदोलाविलासजनितस्मरः ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
कहीं पर जलो का सुन्दर विलास है, कहीं पर मेघो के
गर्जन से घर्घरध्वनि युक्त है और कहीं पर प्रमत्त अप्सराओं के दोलाविलासों से काम पैदा करनेवाला
है