Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 64, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 64, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 64 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
क्वचित्पिशाचकुम्भाण्डवेष्टिताचेष्टदिक्तटः ।
क्वचिद्विद्याधरीसिद्धनृत्यगीतसरित्तटः ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
कहीं पर उसके दिशातट पिशाचो एवं कुम्भाण्डो से वेष्टित होने के कारण स्तब्ध हैं और
कहीं पर तो उसके नदीतट पर विद्याधरी ओर सिद्ध नृत्य कर रहे हैं गीत गा रहे हैँ