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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 64, Verse 26

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 64, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 64 · श्लोक 26

संस्कृत श्लोक

क्वचित्कमलिनीकोशवक्त्रस्थाध्यानमण्डलः । क्वचित्स्वर्गाङ्गनासिद्धसुन्दरीदन्तमण्डनः ॥ २६ ॥

हिन्दी अर्थ

कहीं पर अपने कोशरूपी मुखपर स्थित भ्रमरभूत नेत्रो से ध्यान कर रही कमलिनियों का समूह भरा पड़ा है, तो कहींपर अप्सराओं ओर सिद्धो की रमणियों की दांतों को सुशोभित करनेवाले ताम्बूलों का वन अतिरमणीय लगता है