Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 64, Verse 50
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 64, verse 50 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 64 · श्लोक 50
संस्कृत श्लोक
कोरकोच्चस्तनभरा समग्ररसशालिनी ।
लतावरवनेनेव करपल्लवशालिनी ॥ ५० ॥
हिन्दी अर्थ
फूलों के मुकुलों के सदृश
उन्नत स्तनोवाली मैं समग्र गुणों से धीरे-धीरे ऐसे सुशोभित होने लगी, जैसे पल्लवरूप कर से
युक्त लता वरश्रेष्ठ वन से सुशोभित होने लगती है