Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 64, Verse 51
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 64, verse 51 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 64 · श्लोक 51
संस्कृत श्लोक
सर्वस्य जन्तुजातस्य नित्यं हृदयहारिणी ।
हरिणीतारनयना मदनोन्माददायिनी ॥ ५१ ॥
हिन्दी अर्थ
मैं सदा ही सभी तरह के जन्तुओं के
हृदयो का अपहरण करनेवाली हो गई, हिरन के जैसे बड़े-बड़े नेत्रोवाली मुञ्चे देखकर कामदेव को
भी मुझसे उन्माद होने लग गया