Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 64, Verse 6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 64, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 64 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

तत्र द्वीपैः समुद्रैश्च वलितं वलयैरिव । पाटलोत्थं जगल्लक्ष्म्याः प्रकोष्ठमिव भूतलम् ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

उन तीनों में जो भूतल है, वह कंकणों के सदृश द्वीपो ओर समुद्रं से वलित है यानी चारों ओर से घिरा हुआ है, इसलिए उनके रंग से पाटल वर्ण का बना हुआ उन्नत वह जगत्‌-लक्ष्मी का करमूल एक तरह से बनकर स्थित है