Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 64, Verse 66
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 64, verse 66 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 64 · श्लोक 66
संस्कृत श्लोक
कदलीकन्दलीस्कन्धदोलान्दोलनलीलया ।
लालितोद्यानखण्डेषु मुखमाच्छाद्य रोदिमि ॥ ६६ ॥
हिन्दी अर्थ
॥ उद्यानभागों में सखियों द्वारा कदली, कन्दली
आदि के कन्धोपर विरचित हिंड़ोंलों पर दोलनलीला से जब मैं झुलाई जाती हँ, तब मैं लज्जा से
मुख छिपाकर रोती हूँ