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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 65, Verse 12

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 65, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 65 · श्लोक 12

संस्कृत श्लोक

विरागवासनास्तेन सर्वभावानुरञ्जना । तवोपदेशेनेच्छामि मुने निर्वाणमात्मनः ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

हे मुने, उक्त क्रम से विराग की वासनाएँ प्राप्त कर सभी पदार्थों में उन्हीं को लगा रही हूँ, अब मैं आपके उपदेश से अपनी मुक्ति चाहती हूँ