Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 65, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 65, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 65 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
यदा मामनपेक्ष्यैव स मद्भर्तात्मनि स्थितः ।
तदा विरागो वैरस्यमनयन्मे जगत्स्थितिम् ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
जब मेरी परवाह ही न कर मेरे पति अपनी आत्मा में अवस्थित हुए, तभी जगत्
स्थिति में वैराग्य ने मुझे नीरसता पैदा कर दी