Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 66, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 66, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 66 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
कुण्डलं त्रिजगल्लक्ष्म्या नीलं भूतलमण्डलम् ।
स्थितं चञ्चलमाचारचञ्चलायाः स्फुरन्मणि ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
वहाँ पर भी नीला भूतलमण्डल स्थित है । वह ठीक आचरणों से चंचल त्रिजगतिरूप लक्ष्मी
का चमक रहे मणियों से युक्त चंचल कुण्डल-सा लगता है