Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 66, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 66, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 66 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
बुद्ध्यादिरहितां स्पन्दसंविदं वायवीमिव ।
स्थावरं जंगमं चैव सूक्ष्ममादाय जायते ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
वहाँ पर स्थावर जंगमात्मक
प्राणियों का दल-बुद्धि आदि से शून्य बाह्य वायु की क्रिया के सदृश-भीतरी सूक्ष्म प्राणनाम
की स्पन्दसंवित् को लेकर जन्म आदि विकार प्राप्त करता है