Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 66, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 66, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 66 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
सप्तानां जलमब्धीनामौर्वाग्निः पिबति ज्वलन् ।
लोकान्तराणामाकल्पं कालो भूतगणं यथा ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे चौदह भुवनो के प्राणियों को काल कल्प तक पीता है,
वैसे ही वहाँ भी सात समुद्रो का जल जलती हुई और्वाग्नि (बड़वानल) पीती हैं