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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 66, Verse 23

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 66, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 66 · श्लोक 23

संस्कृत श्लोक

उत्पातमेघनिर्ह्रादभूमिकम्पग्रहग्रहैः । अप्यातैरपि विज्ञातैर्भूतानां जायते गतिः ॥ २३ ॥

हिन्दी अर्थ

ज्योतिषियों द्वारा ओर अन्यां द्वारा अज्ञात उत्पात के हेतु मेच, विद्युत्पतन, भूकम्प तथा ग्रह आदि से प्राणियों की इष्ट-अनिष्टरूप गति वहाँ पर भी होती है