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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 66, Verse 22

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 66, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 66 · श्लोक 22

संस्कृत श्लोक

स्थिताः पवनभूकम्पमेघतापसहिष्णवः । स्वं प्रदेशमनुज्झन्त्यः ककुभः स्तम्भिता इव ॥ २२ ॥

हिन्दी अर्थ

वहाँ पर भी यहाँ की नाई स्थावर प्राणियों के सदृश पवन, भूकम्प, वृष्टि ओर धूप सहनेवाली दिशाएँ स्थित हैं