Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 66, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 66, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 66 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
अर्णवा अर्णसा भान्ति यान्त्यन्तः शनकैः प्रजाः ।
भूतान्यजस्रं जायन्ते म्रियन्तेऽविरतं यथा ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
उसके भीतर यहाँ के जैसे ही - जल से समुद्र सुशोभित है, प्रजावर्ग भी धीरे-धीरे
गमन आदि व्यवहार करते हैं , निरन्तर भूत उत्पन्न होते हैं और निरन्तर मरते हैं