Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 66, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 66, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 66 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
देवासुरमनुष्याणां व्यवहारपरम्पराः ।
लोलाः प्रवृत्ता आकल्पमासमुद्रमिवापगाः ओ ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
वहाँ देवता, असुर ओर मनुष्यों की चंचल व्यवहारपरंपरा यहाँ के
सदुश कल्पतक उस तरह विद्यमान रहती है, जिस तरह समुद्रतक नदीधारा विद्यमान रहती
है