Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 66, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 66, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 66 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
दिनपद्मानि भूलोकसरस्याकल्पमानभः ।
लोलाभ्रालीनि फुल्लानि मीलितोन्मीलितान्यलम् ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
भूलोकरूपी तालतल में कल्पपर्यन्त ओर आकाश तक रहनेवाले दिनरूपी कमल भी यहाँ
हुए हैं, दिनरूप कमलो में लोल(चंचल)भम्र ही भ्रमर हैं, वे विकसित ओर निमीलित भी होते
हैं