Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 66, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 66, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 66 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

चन्द्रचर्चाश्चतुर्दिक्कं चन्दनेनात्मतेजसा । रचयन्रात्रिरोहिण्योस्तमो हन्त्यपि हृद्गतम् ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसा कि इस जगत्‌ में है, ठीक वैसा ही उस जगत्‌ में भी चन्द्रमा अपनी ज्योत्सनारूपी चन्दन से चारों दिशाओं में लेपनकर रात्रि में रोहिणी का भीतरी और बाहरी अन्धकार निवृत्त कर देता है