Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 67, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 67, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 67 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
क्व पुण्यपापकलना क्व कलाकालकेलयः ।
क्व सुरासुरवैराणि क्व द्वेषस्नेहरीतयः ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
कहाँ पुण्य-पाप की गतियाँ हैं, कहाँ काल की कलाओं का
विलास है, कहाँ सुर और असुरों का युद्ध है और यहाँ कहाँ हैं -द्वेष एवं स्नेह की पद्धतियाँ ?