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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 67, Verse 18

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 67, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 67 · श्लोक 18

संस्कृत श्लोक

अभूद्यत्स्वजगत्पूर्वमतिप्रकटमेव मे । तत्पश्यामीदमादर्श इव बिम्बितमस्फुटम् ॥ १८ ॥

हिन्दी अर्थ

जो जगत्‌ मेरे लिए पहले अत्यन्त विस्पष्ट था, उसको मैं अब दर्पण में प्रतिबिम्ब के सदृश अस्पष्ट देखती हूँ