Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 67, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 67, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 67 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
अज्ञोऽपि तज्ज्ञतामेति शनैः शैलोपि चूर्ण्यते ।
बाणोप्येति महालक्ष्यं पश्याभ्यासविजृम्भितम् ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
अभ्यास से धीरे-धीरे अज्ञानी भी ज्ञानी बन जाता है, पर्वत भी चूर्ण हो जाता
है, अचेतन बाण भी सूक्ष्मतम लक्ष्य को प्राप्त करता है, देखिए अभ्यास की कितनी महत्ता है