Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 67, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 67, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 67 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
अभ्यासेन कटुद्रव्यं भवत्यभिमतं मुने ।
अन्यस्मै रोचते निम्बस्त्वन्यस्मै मधु रोचते ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
मुने, अभ्यास से ही कटु पदार्थ अभीष्ट हो
जाता है, अभ्यास से ही किसीको नीम अच्छा लगता है और किसीको मधु अच्छा लगता है