Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 67, Verse 31
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 67, verse 31 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 67 · श्लोक 31
संस्कृत श्लोक
आधिभौतिकदेहोऽसौ धारणाभ्यासभावनात् ।
विहंगवत्खमभ्येति पश्याभ्यासविजृम्भितम् ॥ ३१ ॥
हिन्दी अर्थ
यह आधिभौतिक देह धारणा के अभ्यास की भावना से ही पक्षियों
के सदुश आकाश में उड़ने की सिद्धि प्राप्त करती है, देखिए यह भी अभ्यास का ही प्रभाव
है