Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 67, Verse 30
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 67, verse 30 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 67 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
आतिवाहिकदेहोऽयं शुद्धचिद्व्योम केवलम् ।
आधिभौतिकतामेति भावनाभ्यासयोगतः ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
देह में भोतिकता की श्रान्ति भरी स्वाभाविक भौतिकता के अभ्यात्न से ही होती है, यह
कहती है ।
भावनाभ्यास योग से ही केवल विशुद्ध चिदाकाश रूप यह आतिवाहिक देह आधिभौतिक
रूप बन जाती है