Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 67, Verse 34
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 67, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 67 · श्लोक 34
संस्कृत श्लोक
येनाभ्यासः परित्यक्त इष्टे वस्तुनि सोऽधमः ।
कदाचिन्न तदाप्नोति वन्ध्या स्वतनयं यथा ॥ ३४ ॥
हिन्दी अर्थ
अतएव शाख्रीय शुभाभ्यास कदापि नहीं छोड़ना चाहिए, यह कहती हैं /
इष्ट वस्तु के विषय में जिसने अपना अभ्यास छोड़ दिया, वह मनुष्यों मेँ अधम है, वह उस
वस्तु को ऐसे प्राप्त नहीं कर सकता, जैसे वन्ध्या अपने पुत्र को